यह तो ‘होम ग्राउंड’ था, असली मैच बाकी है

यह तो ‘होम ग्राउंड’ था, असली मैच बाकी है

 

चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के लिए एक्जिट पोल सामने आए हैं. एक्जिट पोल को फाइनल नतीजा नहीं माना जा सकता, इसके बावजूद अगर यह सच होता है, तो बीजेपी दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाती दिख रही है. इस एक्जिट पोल के आधार पर बीजेपी के नेता इस बात की घोषणा भी करने लग गए हैं कि अब 2014 में आम चुनाव भी उनके नाम होगा. लेकिन बीजेपी को यह नहीं भूलना चाहिए कि ये चारों राज्य होम ग्राउंड के तरह थे, लेकिन 2014 में तो ‘विदेशी’ पिच पर भी खेलना होगा, ऐसी पिच पर जहां बीजेपी का कोई खास वजूद नहीं है.

 

दिल्ली में कुल 7 लोकसभा सीटें हैं, छत्तीसगढ़ में 11, मध्यप्रदेश में 29 और राजस्थान में 25. इन सीटों को अगर जोड़ दिया जाए, तो कुल 72 सीटें होती हैं. अब इनमें से कॉंग्रेस को विधानसभा चुनाव के एक्जिट पोल में मिली सीटों के हिसाब से बांटें, तो इन 72 सीटों में बीजेपी को ज्यादा से ज्यादा 37 सीटें मिल सकती हैं. इसके अलावा बीजेपी या एनडीए के घटक दल उत्तराखंड, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, यूपी और उत्तराखंड में बढ़िया सीट हासिल कर सकते हैं. इन सभी जगहों को मिला दें, तो कुल सीटें 268 होती हैं, इन राज्यों में बीएसपी, समाजवादी पार्टी तथा कॉंग्रेस जैसे दलों को आधी सीटें दें और बीजेपी को आधी भी दे दें, तो भी उनके पास 134 सीटें आएंगी। इसके अलावा ऑंध्रप्रदेश, असम, जम्मू-कश्मीर, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित राज्यों को मिलाकर कुल 189 सीटों पर बीजेपी आज बहुत मजबूत नहीं है. यदि यह मान लिया जाए कि बीजेपी इन सीटों पर बेहतरीन पर्दर्शन करेगी और बीस प्रतिशत सीट ले आएगी, तो भी ज्यादा से ज्यादा बीजेपी या एनडीए को 40 सीटें आ पाएंगी. यानि अगर सारी सीट मिला दी जाए, तो भी बीजेपी को कुल 211 के आसपास का आंकड़ा ही हासिल कर पाएगी. वो भी तब जब हम बीजेपी के उस प्रदर्शन को आंक रहे हैं, जो एक्जिट पोल के मुताबिक वो इन चार राज्यों में कर रही है.

 

211 सीटों के साथ नरेंद्र मोदी अगर सरकार बनाना चाहें, तो मुश्किल है. एनडीए के बाहर से घटक दलों को जुटाना मोदी के लिए आसान नहीं होगा. ऐसी स्थिति में अभी जो चुनाव हुए हैं, उसे इसी प्रकार देखा जाना चाहिए, जैसे टीम इंडिया को होम पिच पर देखा जाता है. जब साउथ अफ्रीका की पिच पर मुकाबला होगा, तो स्थिति दूसरी होगी. कुल मिलाकर जो स्थिति बनती दिख रही है, उसके मुताबिक आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री बन पाना नरेंद्र मोदी के लिए संभव नहीं दिख रहा है. ऐसी स्थिति में बीजेपी को टीएमसी, बीएसपी, एआईएडीएमके, जेडीयू और बीजेडी जैसे दलों के सहयोग की जरूरत पड़ेगी. मौजूदा राजनीतिक स्थिति में जयललिता के अलावा वर्तमान एनडीए को और कहीं से समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है. ऐसे में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को किसी दूसरे ‘स्वीकार्य’ नेता के लिए जगह खाली करनी होगी. क्योंकि इसके अलावा भी कुछ लोकसभा सीटें हैं, जहां बीजेपी मजबूत नहीं है.

 

राजनीति में इस हिसाब से न तो विश्लेषण होता है और न ही सीटें गिनी जाती हैं, इसके बावजूद अगर बीजेपी के नेताओं का दावा है कि यह लोकसभा चुनाव के नतीजों की झांकी है, तो उन्हें इसी आधार पर यह भी समझना होगा कि नरेंद्र मोदी की राह आसान नहीं है. होम ग्राउंड और विदेशी पिचों में फर्क होता है.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s