इसे ‘मोदी लहर’ कैसे मान लें?

  • यह शिवराज, रमण, वसुंधरा, डॉ. हर्षवर्धन की जीत है।
  • आम आदमी पार्टी ने जो किया, वो इतिहास में दर्ज होग।

पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में से 4 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं. इन चार राज्यों में से बीजेपी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को अपने पास रखने में कामयाब रही है और राजस्थान कॉंग्रेस से छीना है. दिल्ली में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत हासिल नहीं कर पाई.

 

बीजेपी द्वारा इन चुनावों में पार्टी की सफलता का श्रेय बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को दिया जा रहा है. कहा जा रहा है कि देश भर में नरेंद्र मोदी के नाम की लहर है और इस विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि 2014 आम चुनाव में मोदी लहर पर सवार होकर बीजेपी दिल्ली की सत्ता पर काबिज होगी और मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे.

 

सभी पार्टियां अपनी तरफ से अलग अलग दावे करने के लिए स्वतंत्र हैं. नरेंद्र मोदी उनके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, लिहाजा राजनीतिक दृष्टि से यह ठीक भी है कि वे अब नरेंद्र मोदी के नाम पर माहौल बनाएं. लेकिन यह कहना कि ये विधानसभा चुनाव मोदी लहर की वजह से जीते, यह ठीक नहीं होगा. बीजेपी के एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि अगर नरेंद्र मोदी के नाम की लहर नहीं होती, तो बीजेपी के ये नतीजे नहीं होते.

 

अब गौर करते हैं नतीजों पर. बीजेपी चार में से तीन जगहों पर सरकार बनाने जा रही है. दिल्ली, जहां भारतवर्ष के कोने-कोने से लोग आते हैं, वहां बीजेपी सरकार नहीं बना पाई और सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी बहुमत से दूर रही. अगर नरेंद्र मोदी की लहर थी, तो आखिर दिल्ली में बीजेपी बहुमत हासिल करने से चूक क्यों गई या फिर बीजेपी को विजय गोयल की जगह डॉ. हर्षवर्धन को उम्मीदवार क्यों बनाना पड़ा? छत्तीसगढ़ में यह आलेख लिखे जाने तक मतगणना जारी है और अंतिम नतीजे नहीं आए हैं, इसके बावजूद अभी तक के नतीजों के मुताबिक बीजेपी 39 सीटों पर जीत चुकी है, जबकि कॉंग्रेस ने 36 सीटों पर बाजी मारी है. 9 सीटों पर बीजेपी और 4 सीटों पर कॉंग्रेस आगे चल रही है. कहने का मतलब यह है कि छत्तीसगढ़ में काफी कांटे का मुकाबला रहा. छत्तीसगढ़ में सुबह से ही रुझान में कॉंग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला चलता रहा. अंत में नतीजे बीजेपी के पक्ष में आते नजर आ रहे हैं. इस उठा-पटक से यह बात तो तय हुई कि छत्तीसगढ़ में भले ही बीजेपी सरकार बना ले, लेकिन उसके उम्मीदारों की कॉंग्रेस उम्मीदवारों पर जीत का अंतर काफी कम रहेगा. छत्तीसगढ़ वही राज्य है, जहां नरेंद्र मोदी ने 12 सभाएं कीं और 90 में से 38 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचे.

 

दरअसल यह जीत नरेंद्र मोदी की नहीं या नरेंद्र मोदी की लहर की नहीं है. यह जीत मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की है, राजस्थान में वसुंधरा राजे की है और छत्तीसगढ़ में जनता के बीच ‘चौर वाले बाबा’ के नाम से मशहूर रमण सिंह की है. दिल्ली में अगर बीजेपी पहले स्थान पर आई, तो इसके पीछे मोदी की छवि नहीं, बल्कि डॉ. हर्षवर्धन की छवि रही होगी. बीजेपी के दिल्ली के बड़े नेता विजय गोयल को हटाकर डॉ. हर्षवर्धन को लाने की वजह शायद यही रही होगी. इसके अलावा जैसा कि पहले भी मैंने लिखा है कि 2014 में होने वाले आम चुनाव इस चुनाव से बेहद अलग होंगे और इनमें से ज्यातार राज्यों में बीजेपी ने 2003 में भी बढ़िया प्रदर्शन किया था और 2004 लोकसभा चुनाव में उसे दोहरा नहीं पाई थी. रही बात दिल्ली की, तो यहां आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन को न तो कॉंग्रेस आंक पाई थी, न बीजेपी और न पत्रकार. आप ने जो किया, वो इतिहास बन गया और इतिहास बनाने वाली घटना का सही आकलन कभी भी इतना आसान नहीं रहा है.

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