जनता ने बढ़ाई पीएम मोदी की रेटिंग

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बढ़ी पीएम मोदी की रेटिंग! सड़क से सोशल मीडिया तक, मोदी…मोदी।

भारत के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन लेफ्टिनेंट जनरल रनवीर सिंह ने 29 सितंबर की दोपहर मैं जैसे ही ये ऐलान किया कि उरी हमलों के दस दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक (हमला) किया है व लाइन ऑफ कंट्रोल के पार आतंकवादी ठिकानों पर हमला कर न केवल उसे नष्ट किया है, बल्कि 38-40 आतंकियों को मार गिराया है, वैसे ही देश भर में ख़ुशी की लहर दौड़ उठी। उरी हमले के बाद लोग सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे थे। पांच दिन पहले खुद पीएम मोदी कहा था कि उरी हमले को नहीं भूलाया जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सड़क से लेकर सोशल मीडिया में, हर जगह बस देश अपने प्रधानमंत्री व अपनी सेना को बधाइयाँ दे रहा था। बॉलीवुड भी पीछे नहीं रहा, अक्षय कुमार ने ट्वीट कर लिखा , ‘आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए भारतीय सेना पर गर्व है। सरकार के इस साहसिक कदम से खुश हूं।’

फेसबुक पर ‘PMO India’ के आधिकारिक पेज को लाइक करने वालों की संख्या बढ़कर 1 करोड़ 15 लाख से ज्यादा हो गई, जबकि पेज रिव्यू बढ़कर 54 हज़ार हो गया। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता पहले से ही ज्यादा थी, लेकिन इन सर्जिकल स्ट्राइक के बाद फेसबुक के इस पेज ‘PMO India’ की रेटिंग लोगों ने दोपहर से शाम होते होते 4.6 से बढ़ाकर 4.8 कर दी। कुल 54 हजार लोगों में से 48 हजार लोगों ने 5 में से 5 रेटिंग दिए, करीब 3.5 हज़ार लोगों ने 4 रेटिंग दिए , महज 1 हजार लोगों ने 3, 438 लोगों ने 2 और 1100 लोगों ने 1 रेटिंग दिए। लोगों ने रिव्यू करते वक़्त प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की है। एक फेसबुक यूजर स्वाति चौरसिया ने लिखा है कि वाकई प्रधानमंत्री मोदी ने सबित कर दिया कि जरुरत पड़ने पर करारा जवाब देंगे। वैभव विवेक नाम के यूजर ने लिखा कि सोता हुआ शेर ज्यादा खतरनाक होता है, ये दुनिया भूलने लगी थी शायद और यह तो भारत माता की सवारी वाला शेर है।

सेना की इस कार्रवाई के बाद क्या पक्ष क्या विपक्ष सबने सेना और सरकार की तारीफ की। आज की तारीख में यदि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के लिए कोई सर्वे हो तो रिकॉर्ड समर्थन मिलना तय है। फेसबुक पर ‘PMO India’ के पेज की रेटिंग एक दिन में 4.6 से बढ़कर 4.8 होना भी इसी ओर इशारा करता है।

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पाकिस्तान पर भारत का बड़ा हमला

पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोझिकोड में दिए अपने भाषण से पाकिस्तान की आवाम को उनकी ही सरकार के नापाक इरादों के बारे में बताने की कोशिश की और अब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज संयुक्त राष्ट्र के मंच से पकिस्तान की पोल खोलने में कामयाब रहीं। दोनों ही भाषणों में कहीं न कहीं मानवाधिकार की बात पर भी जोर दिया गया। संभवतः ये भाषण, खासकर संयुक्त राष्ट्र में विदेश मंत्री का भाषण, एक रणनीति के तहत ही हिंदी में दिए गए ताकि पाकिस्तानियों को बात बेहतर तरीके से समझ में आए क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया कोस-कोसकर ही सही, पर बार-बार चलाएगा।

सुषमा स्वराज ने यूएनजीए में दिए अपने भाषण में साफ़ तौर पर पाकिस्तान को अलग थलग करने की एक बेहतर कोशिश की। सुषमा ने आतंकवाद की तुलना एक ऐसे राक्षस से की जिसके कई हाथ हैं और वो आधुनिक तकनीक से लैस है। उन्होंने कहा कि ये राक्षस कभी भी और कहीं भी प्रकट हो सकता है इसलिए हमारा आतंकवाद और आपका आतंकवाद वाली सोच नहीं चल सकती। सुषमा ने पाकिस्तान के साथ खड़े देशों को इशारों में साफ़ कहा कि आतंकवाद से लड़ने के लिए पुराने समीकरण बदलने होंगे, मोह त्यागना होगा और एहसान भुलाने होंगे। उन्होंने कहा कि ये सोचना होगा कि आतंकियों के अपने बैंक अकाउंट नहीं होते, हथियारों के कारखाने नहीं होते, तो फिर कौन उनकी मदद करता है? उनके पास हथियार कहाँ से आते हैं, पैसे कौन देता है? बिना पाकिस्तान का नाम लिए उन्होंने कहा कि ऐसा भी देश है जहाँ संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी घोषित व्यक्ति खुलेआम जहर उगलता है। सुषमा ने कहा कि जो देश आतंकवाद के खिलाफ रणनीति में शामिल तक नहीं होना चाहता, उसे अलग थलग कर देना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को भी करारा जवाब दिया। उन्होंने बलूचिस्तान का जिक्र करते हुए दुनिया को बतलाया कि वहां के लोगों का दमन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमने दो वर्षों में मित्रता का नया पैमाना खड़ा किया और बदले में हमें पठानकोट और उरी जैसे हमले झेलने पड़े। उन्होंने सीमा पार से आए आतंकी बहादुर अली का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को यह भी याद दिलाया कि हमारे पास जिंदा सबूत है। सुषमा दुनिया को ये संदेश देने में सफल रहीं कि आज दुनिया को उस Comprehensive Convention on International Terrorism (सीसीआईटी) की जरुरत है जिसकी वकालत भारत 90 के दशक से ही कर रहा है।

इन दोनों भाषणों में एक तरफ तो पाकिस्तानी हुकूमत को पाकिस्तानी आवाम व विश्व समुदाय के सामने घेरने की कोशिश हुई तो वहीं दूसरी तरफ पकिस्तान को कड़े शब्दों में कहा गया कि वो कश्मीर के सपने ना देखे क्योंकि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत की ये दोहरी कोशिश पाकिस्तान के हुक्मरानों का असली चेहरा न केवल दुनिया के सामने लाएगी बल्कि वे अपने देश में भी बेनकाब होंगे। बशर्ते ये कोशिश अनवरत जारी रहे क्योंकि युद्ध तो अंतिम उपाय है।

सिद्धार्थ रंगनाथ रामेश्वरम्

स्वतंत्र पत्रकार

@srameshwaram

एक सच जो बन गया ‘वायरल झूठ’

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई झूठ के बीच हमारी सेना के हित से जुड़ा एक सच भी दुर्भाग्यवश झूठ समझा जा रहा है। दरअसल हाल में सियाचिन में हुई बर्फबारी के कारण सेना को जानमाल का नुकसान हुआ था। सेना के मुताबिक इसके बाद देश में सेना की मदद करने के लिए भावनात्मक ज्वार उमड़ पड़ा। लोग हताहत हुए सैनिकों के परिजनों की आर्थिक मदद करना चाहते थे। पहले भी इस तरह के अनुरोध आते रहे थे, सो Army Welfare Fund Battle Casualties के नाम पर Syndicate Bank की दिल्ली स्थित एक शाखा में रक्षा मंत्रालय द्वारा खाता खोला गया। कहा गया कि लोग इसमें शहीदों के परिवारों की मदद के लिए अपनी सुविधानुसार पैसे जमा करा सकते हैं। ये खबर देश के कई अखबारों और न्यूज़ चैनल्स ने भी दिखाई थी। लेकिन इस बीच सोशल मीडिया में इसे फ़र्ज़ी बताया जाने लगा। इसके बाद 2 सितंबर को Additional directorate general of public information, IHQ of MoD ने स्पष्टीकरण जारी किया ( https://twitter.com/adgpi/status/771575930145779712 )। ये खबर भी कई जगह चली। इसी बीच उरी हमले के बाद फिर से सोशल मीडिया पर ये जानकारी दी जाने लगी, लेकिन ज्यादातर लोग इसे फ़र्ज़ी ही मानते रहे। पुनः 22 सितंबर को आर्मी की तरफ से कहा गया कि ये जानकारी गलत नहीं है। सिंडिकेट बैंक ने भी प्रेस रिलीज़ जारी करके इसे सही बताया। यहाँ दोनों रिलीज़ और उनके स्रोत दिए गए हैं। मेरा आग्रह है कि वायरल हो रहे तमाम झूठ के बीच इस सचाई को पहचानिये। अगर जानकारी नहीं है, तो बिना जाने इसे झूठ मत कहिये। इससे हमारे जवानों के परिवारों को मिलने वाली मदद कम हो जाएगी। आप योगदान नहीं करना चाहते हों तो मत करिए, लेकिन बिना जाने उनकी मदद को रोकने का काम मत करिए। बड़ी बात तो ये कि इसे ड्राफ्ट के रूप में सीधे आर्मी को भी भेजा जा सकता है, फिर शक कैसा? ( 22 सितंबर का ADG PI-Indian Army का ट्वीट – https://twitter.com/adgpi/status/778898773892173824 ), सिंडिकेट बैंक की रिलीज़ – https://www.google.co.in/url?sa=t&source=web&rct=j&url=https://www.syndicatebank.in/Announcement/Army_Battle_Casualties.pdf&ved=0ahUKEwi77ovcjaXPAhUFkZQKHSuOD1QQFggdMAA&usg=AFQjCNHxMJBN6-vruueQ0SmkkRY4zsxagA&sig2=uPyi5dExnJbAjvRR3SafDw )