पाकिस्तान पर भारत का बड़ा हमला

पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोझिकोड में दिए अपने भाषण से पाकिस्तान की आवाम को उनकी ही सरकार के नापाक इरादों के बारे में बताने की कोशिश की और अब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज संयुक्त राष्ट्र के मंच से पकिस्तान की पोल खोलने में कामयाब रहीं। दोनों ही भाषणों में कहीं न कहीं मानवाधिकार की बात पर भी जोर दिया गया। संभवतः ये भाषण, खासकर संयुक्त राष्ट्र में विदेश मंत्री का भाषण, एक रणनीति के तहत ही हिंदी में दिए गए ताकि पाकिस्तानियों को बात बेहतर तरीके से समझ में आए क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया कोस-कोसकर ही सही, पर बार-बार चलाएगा।

सुषमा स्वराज ने यूएनजीए में दिए अपने भाषण में साफ़ तौर पर पाकिस्तान को अलग थलग करने की एक बेहतर कोशिश की। सुषमा ने आतंकवाद की तुलना एक ऐसे राक्षस से की जिसके कई हाथ हैं और वो आधुनिक तकनीक से लैस है। उन्होंने कहा कि ये राक्षस कभी भी और कहीं भी प्रकट हो सकता है इसलिए हमारा आतंकवाद और आपका आतंकवाद वाली सोच नहीं चल सकती। सुषमा ने पाकिस्तान के साथ खड़े देशों को इशारों में साफ़ कहा कि आतंकवाद से लड़ने के लिए पुराने समीकरण बदलने होंगे, मोह त्यागना होगा और एहसान भुलाने होंगे। उन्होंने कहा कि ये सोचना होगा कि आतंकियों के अपने बैंक अकाउंट नहीं होते, हथियारों के कारखाने नहीं होते, तो फिर कौन उनकी मदद करता है? उनके पास हथियार कहाँ से आते हैं, पैसे कौन देता है? बिना पाकिस्तान का नाम लिए उन्होंने कहा कि ऐसा भी देश है जहाँ संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी घोषित व्यक्ति खुलेआम जहर उगलता है। सुषमा ने कहा कि जो देश आतंकवाद के खिलाफ रणनीति में शामिल तक नहीं होना चाहता, उसे अलग थलग कर देना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को भी करारा जवाब दिया। उन्होंने बलूचिस्तान का जिक्र करते हुए दुनिया को बतलाया कि वहां के लोगों का दमन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमने दो वर्षों में मित्रता का नया पैमाना खड़ा किया और बदले में हमें पठानकोट और उरी जैसे हमले झेलने पड़े। उन्होंने सीमा पार से आए आतंकी बहादुर अली का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को यह भी याद दिलाया कि हमारे पास जिंदा सबूत है। सुषमा दुनिया को ये संदेश देने में सफल रहीं कि आज दुनिया को उस Comprehensive Convention on International Terrorism (सीसीआईटी) की जरुरत है जिसकी वकालत भारत 90 के दशक से ही कर रहा है।

इन दोनों भाषणों में एक तरफ तो पाकिस्तानी हुकूमत को पाकिस्तानी आवाम व विश्व समुदाय के सामने घेरने की कोशिश हुई तो वहीं दूसरी तरफ पकिस्तान को कड़े शब्दों में कहा गया कि वो कश्मीर के सपने ना देखे क्योंकि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत की ये दोहरी कोशिश पाकिस्तान के हुक्मरानों का असली चेहरा न केवल दुनिया के सामने लाएगी बल्कि वे अपने देश में भी बेनकाब होंगे। बशर्ते ये कोशिश अनवरत जारी रहे क्योंकि युद्ध तो अंतिम उपाय है।

सिद्धार्थ रंगनाथ रामेश्वरम्

स्वतंत्र पत्रकार

@srameshwaram

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