केजरीवाल जी, देश से बड़ी नहीं राजनीति

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर स्थित आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए भारतीय सेना द्वारा अंजाम दिए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से देश भर में हमारी सेना और सरकार की जय-जयकार हो रही है। जाहिर है कि इतना बड़ा फैसले लेने की वजह से पीएम मोदी का कद और बढ़ गया है। माहौल कुछ ऐसा हो गया कि विपक्ष को भी मोदी की तारीफ करनी पड़ी। सिर्फ तारीफ ही नहीं, बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और मोदी के धुर विरोधी अरविंद केजरीवाल को तो अपनी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस तक टालनी पड़ गई क्योंकि उस प्रेस कॉन्फ्रेंस का एजेंडा मोदी सरकार के खिलाफ था और केजरीवाल उनके खिलाफ उस माहौल में खुलकर सामने नहीं आना चाहते थे। लेकिन इतिहास गवाह है कि राजनीति व स्वार्थ दो ऐसी चीजें हैं जो यदा-कदा देश या देशहित से भी बड़ी हो जाती हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ। अरविंद केजरीवाल ने कल अपने ट्वीटर हैंडल से अपना एक वीडियो जारी किया, जिसमें कहने को तो वे मोदी सरकार की तारीफें कर रहे थे पर लगे हाथ इशारे में ये मांग भी रख दी कि मोदी सरकार सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत सामने रखे। केजरीवाल ने सवाल उठाए तो फिर कांग्रेस के बड़े नेता संजय निरुपम ने भी अपने एक ट्वीट में सर्जिकल स्ट्राइक को फ़र्ज़ी कह डाला।

दरअसल शुरुआत अरविंद से हुई और अरविंद को ये मौका दिया पाक प्रायोजित प्रोपगेंडा ने। इसमें पाकिस्तान लगातार यह कहे जा रहा है कि भारत ने कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं की थी और वो सामान्य गोलीबारी भर थी। पाकिस्तान ने इसके लिए कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के पत्रकारों का सहारा लिए और उन्हें कथित तौर पर उस जगह ले गए जहाँ भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसके लिए पाकिस्तान ने ख़ासा वक़्त लिया और संभवतः सबूत मिटा दिए या उन पत्रकारों को सही जगह पर लेकर गए ही नहीं। लिहाजा पाकिस्तान सीएनएन और बीबीसी जैसे अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के जरिए भारत के दावों पर सवाल खड़े करने में कुछ हद तक कामयाब रहा। केजरीवाल ने यहीं पर अपने लिए मौका देखा और पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब करने के नाम पर सर्जिकल स्ट्राइक पर ही सवाल खड़े कर डाले। केजरीवाल को शायद अंदाज़ा नहीं था कि वो ऐसा करके पाकिस्तान को एक और मौका दे रहे हैं और अनजाने में ही उसके प्रोपगेंडे को बल प्रदान कर रहे हैं। केजरीवाल के ट्वीट को पाकिस्तानी पत्रकारों, नागरिकों वो राजनीतिज्ञों ने खूब शेयर किया और लिखा कि भारत में ही सेना पर सवाल खड़े हो गए और कहा कि भारत झूठ बोल रहा है।

भारत में अपनी सेना पर ही सवाल उठने के मायने ये हैं कि भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक की वजह से हताश और परेशान पाकिस्तान को एक मौका मिल गया। कल तक जो आम पाकिस्तानी अपनी सरकार और सेना को कमजोर समझकर लताड़ रहा था, वो अब सर्जिकल स्ट्राइक को सच ही नहीं मानेगा और  वहां सेना व सरकार के प्रति निराशा का दौर समाप्त हो जायेगा। पकिस्तान यही तो चाहता था।

ये बात कई पूर्व सैनिक भी कह चुके हैं कि भारत ने पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक की है, लेकिन इसे कभी सार्वजनिक नहीं किया। पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी कल यही बात दोहराई। मोदी सरकार ने उरी हमलों के बाद अपनी छवि बचाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की बात सार्वजनिक की हो ये संभव है। इसका फायदा राजनैतिक तौर पर मोदी को मिलेगा ये भी तय है। लेकिन इससे भी इतर ये भी तय है कि इसकी वजह से पाकिस्तानी सेना और सरकार दबाव में आ गए थे और जनता निराश थी। मोदी के इस मास्टरस्ट्रोक का कोई जवाब नहीं दिखा तो केजरीवाल और निरुपम ने सर्जिकल स्ट्राइक को ही झूठा कह डाला। सरकार की तरफ से वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी क्योंकि केजरीवाल और निरुपम को हो न हो पर देश की जनता को अपनी सेना पर पूरा भरोसा है। याद रखें जब अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा को मारा था तब अमेरिका पर भी झूठ बोलने के आरोप लगे थे और सबूत मांगे गए थे, पर अमेरिका ने कभी इसकी जरूरत नहीं समझी। हमारी सरकार या सेना को भी किसी सबूत या वीडियो जारी करने की भी कोई जरूरत नहीं है। फिलवक्त जरूरत इस बात की है कि केजरीवाल और निरुपम जैसे लोग देशहित को राजनीति से ऊपर रखें।

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