तिल-तिल मरता एक शहर

सीरिया के अलेप्पो के पूर्वी हिस्से में फंसे लोगों के लिए शायद क़यामत आ चुकी है। राष्ट्रपति बशर अल असद की सेना का विद्रोहियों के साथ संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में अब विद्रोही घुटने टेकते नज़र आ रहे हैं, लेकिन बमबारी का दौर अभी थमा नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक सीरियाई सेना लोगों को घर में घुसकर भी गोली मार रही है।संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार 80 से ज्यादा लोगों को देखते ही गोली मार दी गई है। सीरियाई सेना के इस हमले से डरे, घबराए व परेशान लोगों ने अपनी तकलीफ को जाहिर करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है और उनकी आवाज पूरी दुनिया तक पहुँच रही है।

पूर्वी अलेप्पो में रहने वाली सात साल की बच्ची बना अल आबेद ने मंगलवार को अपनी मां की मदद से ट्वीटर पर @AlabedBana हैंडल से लिखा, ‘मेरा नाम बना है। मैं 7 साल की हूँ और इस वक़्त पूर्वी अलेप्पो से पूरी दुनिया से लाइव बात कर रही हूँ। ये शायद मेरी ज़िंदगी के आखरी पल होंगे, मैं जिंदा रहूंगी या शायद मर जाऊंगी।” इस ट्वीट को दुनिया भर के 37 हज़ार लोगों ने रीट्वीट किया। बुधवार को पूर्वी अलेप्पो में ही रहने वाले स्वतंत्र पत्रकार जौहीर अल शिमाले ने ट्वीटर पर ही अपने हैंडल @ZouhirAlShimale से एक वीडियो पोस्ट के जरिए बताया, ‘सिर्फ 1 घंटे के अंदर हमने 100 बमों की गिनती की’। जौहीर ने अपने एक दूसरे ट्वीट में ये भी लिखा, ‘दर्जनों बच्चे-महिलाएं मारे गए व घायल हुए, हमला जारी है इसलिए उन्हें सड़क से उठा भी नहीं सकते’। शिक्षक अल्हमदो अपने हैंडल @Mr.Alhamdo से ट्वीटर पर लिखते हैं, ‘मैं अभी ट्वीट कर पा रहा हूँ, लेकिन फिर शायद कभी नहीं। मेरी बच्ची को बचा लीजिये, ये एक पिता की गुहार है”। अपने दूसरे ट्वीट में वे लिखते हैं, “मैं अपनी बेटी को एक बार केला खिलाना चाहता था, वो ऐसी चीजें पसंद करती है और उसने कभी केला नहीं चखा..पर अब मैं शायद ऐसा कभी न कर पाऊं।” लीना अल शमी नाम की एक महिला ने अपने ट्वीटर हैंडल @Linashamy से एक वीडियो पोस्ट किया और कहा, “अलेप्पो में नरसंहार हो रहा है। ये मेरा अंतिम वीडियो हो सकता है। तानाशाह असद के विरुद्ध विद्रोह करने वाले 50 हजार से अधिक लोगों पर नरसंहार का खतरा है। लोग बमबारी में मारे जा रहे हैं। हम जिस इलाके में फंसे है ये दो वर्गमील से भी छोटा है। यहां गिरता हर बम एक नरसंहार है। अलेप्पो को बचाओ, इंसानियत को बचाओ।” इसे भी दुनिया भर में करीब 30 हज़ार बार रिट्वीट किया गया।
ये शायद पहला मौका है जब इस तरह से किसी युद्धक्षेत्र में फंसे लोगों ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए इस तरह सोशल मीडिया का सहारा लिया है। इनकी बातों से इतना तो तय है कि अलेप्पो तिल-तिल मर रहा है। तभी, स्थानीय पत्रकार मोन्थेर इटाकी अपने हैंडल @montheretaky से ट्वीटर पर लिखते हैं, “अभी जिन्दा हूँ, अपने दोस्तों के साथ नरसंहार का सामना कर रहा हूँ…उम्मीद है अपनी मौत तुम्हें लाइव दिखा पाउँगा।”

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