ख़बरों में क्यों छाया ‘तैमूर’?

सैफ अली खान और करीना कपूर के नवजात बेटे का नाम तैमूर अली खान पटौदी रखा गया है। करीना और सैफ के बेटे का नाम करन जौहर दुनिया के सामने लाए। उन्होंने करीना को बधाई देते हुए ट्वीट किया। जानकारी सामने आते ही छोटे पटौदी यानी तैमूर अली खान पटौदी ख़बरों में छा गए। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा उनके नाम को लेकर हो रही है। वैसे तो तैमूर का अर्थ लोहा होता है, लेकिन तैमूर नाम तैमूर लंग की वजह से ज्यादा जाना जाता है। यही वजह है कि करन जौहर के ट्वीट के बाद लोग सैफीना को बधाई तो दे रहे हैं, लेकिन नाम पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं। यह उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा फैसला है, लेकिन सेलिब्रिटी होने के नाते सैफ और करीना को, सोशल मीडिया पर, अपने ही फैन्स के सवालों से दो-चार होना पड़ रहा है।
कौन था तैमूर लंग?
तैमूर लंग अपनी वीरता से ज्यादा अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात है। समरकंद का शासक तैमूर लंग दूसरा चंगेज खाँ बनना चाहता था। वह लंगड़ा था, इसलिए तैमूर लंग ( लंगड़ा) कहलाता था। हालाँकि अपनी अपंगता को उसने अपनी महत्वाकांक्षा के आड़े कभी नहीं आने दिया।  वह बहुत बड़ा तलवार बाज और अव्वल दर्जे का योद्धा था। वह जहाँ-जहाँ पहुँचा वहां उसने भारी तबाही और नरसंहार मचाया। कहा जाता है कि एक जगह उसने दो हजार जिंदा आदमियों की एक मीनार बनवाई और उन्हें ईंट और गारे में चुनवा दिया।  उसकी विजय यात्रा के साथ ही उसकी क्रूरता की कहानी शुरू हो गई थी और बेशक उसका एक अध्याय भारत भी था। भारत पर तैमूर ने 1399 ई. में आक्रमण किया। अपनी जीवनी तुजुके तैमुरी में उसने भारत पर अपने आक्रमण का कारण बताते हुए लिखा, ‘हिन्दुस्तान पर आक्रमण करने का मेरा ध्येय काफिरों के विरुद्ध धार्मिक युद्ध करना है।’ इससे ये साबित होता है कि वो एक कट्टर मुसलमान था। हालांकि कुछ इतिहासकार ये भी कहते हैं कि ‘काफिरों’ का विध्वंस तो आक्रमण का बहाना मात्र था। वस्तुत: वह भारत के स्वर्ण से आकृष्ट हुआ। भारत की महान्‌ समृद्धि और वैभव के बारे में उसने बहुत कुछ बातें सुन रखी थीं। कहा जाता है कि भारत पर आक्रमण के दौरान कश्मीर में उसने महज कुछ घंटों में दस हज़ार लोगों के सर कलम करवा डाले। तैमूर कश्मीर के बाद अब के पंजाब और हरियाणा के बड़े हिस्से में कत्लेआम मचाता हुआ दिल्ली की ओर बढ़ चला। दिल्ली पर जीत हासिल करने से पहले उसने करीब 1 लाख युद्ध बंदियों को मौत के घाट उतार दिया। दिल्ली पर उसकी चढ़ाई रोकने के लिए तुगलक बादशाह सुल्तान महमूद ने उससे दो-दो हाथ किए, पर सुल्तान को हराकर तैमूर ने दिल्ली में प्रवेश कर लिया, जबकि सुल्तान मैदान छोड़कर भाग खड़ा हुआ। इतिहासकारों की मानें तो दिल्ली में वह 15 दिनों तक रहा और उसने पूरे शहर को कसाईखाना बना दिया। इसके बाद वह समरकंद वापस लौट गया था। दिल्ली की दौलत तैमूर लूटकर समरकंद ले गया। अनेक बंदी बनाई गई औरतों और शिल्पियों को भी तैमूर अपने साथ ले गया। भारत से जो कारीगर वह अपने साथ ले गया उनसे उसने समरकंद में अनेक इमारतें बनवाईं। हालांकि, 18वीं शताब्दी के इतिहासकार एडवर्ड गिब्बन ने तैमूरलंग की तारीफ करते हुए लिखा कि तैमूरलंग की बहादुरी व जंग की काबलियत को कभी स्वीकार नहीं किया गया। तैमूर ने जिन-जिन देशों पर जीत हासिल की। वहां के शासकों ने उसके बारे में हमेशा झूठी कहानिया प्रचारित करवाईं। गिब्बन के अनुसार, तैमूर की मौत 1405 में उस समय हुई, जब वह चीन के राजा मिंग के खिलाफ युद्ध लड़ने जा रहा था। इस दौरान बीच रास्ते में ही बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई। अपाहिज होने के बावजूद तैमूर अपनी आखिरी सांस तक किसी से नहीं हारा।
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