इतने यू-टर्न क्यों सरकार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को जैसे ही नोटबंदी की घोषणा की, उसके कुछ देर बाद ही पीएमओ की तरफ से एक ट्वीट किया गया, जिसमें साफ़ लिखा था कि लोग 500 व 1000 रुपए के पुराने नोटों को 10 नवंबर से लेकर 30 दिसंबर तक पोस्ट ऑफिस या बैंक में अपने खाते में जमा करा पाएंगे। इसके कुछ दिनों बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कहा कि लोगों को हड़बड़ाने की जरुरत नहीं है और उनके पास 30 दिसंबर तक का वक़्त है।

जाहिर है, कुछ लोगों ने बैंकों में शुरूआती भीड़ को देखते हुए व अपने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की बात को मानते हुए थोड़ा इंतज़ार करना ठीक समझा। लेकिन, फिर 19 दिसंबर को अचानक आरबीआई का नोटिफिकेशन आया, जिसमें कहा गया कि लोग 5000 रुपये से ज्यादा के 500 व 1000 के पुराने नोट अब बैंक में सिर्फ एक बार जमा करा पाएंगे और उसपर भी बैंक के दो अधिकारी उनसे पूछताछ करेंगे। इस पर सोशल मीडिया पर हंगामा मचने के बाद खुद वित्त मंत्री सामने आए और कहा कि एक बार जमा कराने पर कोई पूछताछ नहीं होगी, लेकिन 20 दिसंबर की शाम होते-होते खबरें आने लगीं कि लोगों को बैंकों में भारी दिक्कत हो रही है और बैंककर्मी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते, लिहाजा नोटिफिकेशन के आधार पर लोगों से पूछताछ करने के बाद ही 5000 रुपये से ज्यादा के पुराने 500 और 1000 के नोट लिए जा रहे हैं। नोटबंदी को लेकर सरकार पर निशाना साध रही विपक्षी पार्टियों को एक और मौका मिला। यूपी में एक चुनावी रैली में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘आरबीआई उसी प्रकार नियम बदल रही है, जिस प्रकार प्रधानमंत्री कपड़े बदलते हैं।’ वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक ने अपने ब्लॉग में लिखा, ‘नोटबंदी के चक्र-व्यूह में फंसी सरकार को गजब का मतिभ्रम हो रहा है। पिछले 40-42 दिन में वह नोटबंदी संबंधी लगभग 100 फरमान जारी कर चुकी है। कुछ उसने, कुछ रिजर्व बैंक ने और कुछ प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री ने। मरता, क्या न करता? उसे जो भी दवा बताई जाती है, उसे ही वह तुरंत गुड़कने लगती है। दस्त बंद करने की दवा से उसे कब्जी हो जाती है और कब्ज ठीक करने की दवा से उसे दस्त लग जाते हैं।’ वैदिक ने आगे लिखा, ‘यह ठीक है कि सरकार काले धन के सफेदीकरण से घबरा गई है और उसे दहशत बैठ गई है कि उसके अंदाज से कहीं सवाया-डेढ़ा या दुगुना पैसा बैंकों में जमा न हो जाए। अब देखते हैं कि 30 दिसंबर तक सरकार कौनसा नया पैंतरा मारती है?’

दरअसल ये शायद पहला मौका होगा जब लोग सरकार की कही बातों पर यकीन नहीं कर पा रहे। रिज़र्व बैंक और वित्त मंत्रालय बीते 43 दिनों में 60 बार नोटबंदी पर नियम बदल चुका है। सरकार कल कुछ कहती है और आज कुछ। नोटबंदी के बाद लगातार बदले जा रहे नियमों के बीच एक बार फिर आरबीआई ने आज फिर एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। आरबीआई ने सफाई दी है कि 5000 रुपये से ज्यादा के नोट जमा कराते वक्त लोगों से अब बैंक अधिकारी कोई सवाल जवाब नहीं करेंगे। केवाईसी खातों पर एकमुश्त जमा वाला नियम लागू नहीं होगा। सरकार के इन्हीं यू-टर्न पर कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कहते हैं, ‘आरबीआई का मतलब आजकल रिवर्स बैंक ऑफ़ इंडिया हो गया है।’ उनका दावा है कि इन 43 दिनों में आरबीआई और वित्त मंत्रालय ने 126 बार नियम बदले हैं। यहाँ तक कि बीजेपी की सहयोगी पार्टियां भी अब नोटबंदी को लेकर हो रही परेशानियों की वजह से इसकी आलोचना करने लगी हैं, ताज़ा नाम तेलुगू देशम पार्टी का है। लेकिन, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चंडीगढ़ में हुए स्थानीय निकाय के चुनाव परिणामों का उदाहरण देकर कहते हैं कि जनता उनके फैसलों के साथ है।

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